मंगलवार, 16 जुलाई 2013

प्रिय मुझे अपना बनालो




           
पाश में लो बांध मुझको,  एक  नया  संसार ढालो |
ना रहे अस्तित्व मेरा, अंक  में मुझ   को छुपालो |
             प्रिय मुझे अपना बनालो |

कल्पना से सिर्फ जब मन,है प्रफुल्लित तन मुदित है |
अब मिलन की कामना है, कामना में सब उचित  है |
ढेर से स्वपनों को जीवन,- दान देकर   जगमगा लो,
   प्रिय मुझे अपना बनालो |

कुछ दिनों की बात है यह,फिर शमन हो जायगा सब  |
मिल रहा यौवन सतत तब,तन नया सुख पायेगा अब |
पल्लवित नव - रूप लेते,  रूप - यौवन को   सजालो ,
   प्रिय मुझे अपना बनालो |

देह  हों  दोनों  महालय, और  हम  दोनों   प्रवासी  |
प्यार हो बस प्यार उर में, हो नहीं  पल भर  उदासी  |
तुम मुझे दो प्यार अविरल,प्रतिदान  में अनुराग पालो ,
   प्रिय मुझे अपना बनालो |


7 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 19-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है...
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी...
    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।



    जय हिंद जय भारत...


    मन का मंथन... मेरे विचारों कादर्पण...


    यही तोसंसार है...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. पढने और पसंद करने के लिए तथा हलचल में सम्मिलित करने के लिए आभार आशा है आप स्नेह बनाए रखेंगे |

      हटाएं
  2. कनक कनक लौन मिलाए, हरिना मनि हरियार ।
    जोग परै तौ मधुराए, बहुलै करु बर धार ।१३१।

    हरिना = पीलापन लिए हुवे
    मनि =शोभा =हल्दी
    हरिन्मणि = पन्ना ,मरकत मनि
    भावार्थ : -- आटा और स्वर्ण में हल्दी से पीलापन ग्रहण कीहुई हरी तरकारियाँ और हरे रंग की आभा देता हुवा पन्ना लवण और लावण्यता का मिश्रण यदी उचित हो मीठा और सुन्दर लगता है किन्तु अधिक हो तो कड़वा और हाथ में कसा हुवा सा लगता है ॥

    उत्तर देंहटाएं
  3. उत्तर
    1. मा.उत्साहवर्धन के लिए आभार स्नेह और सम्पर्क बनाए रखें

      हटाएं