शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

अस्लियत-ए-थाना



चोर चुरा कर ले गए,घर के थाल-परात |
भान हुआ इस बात का हमको बीती रात |
हमको  बीती  रात,दौड़  कर थाने धाए,
किन्तु  वहां  पर हमने,सारे सोते पाए |
कहे 'राज' कविराय,हिलाकर बहुत जगाया,
हारगए तब,उसकोसौ का नोट दिखाया |

बन्दआंख से दिख गया,मुंशी जी को नोट |
उठकर सीधा हो गया,मारा   हमें सलूट |
मारा  हमें सलूट,कौन काम से आया पूछा,
किस्सा हमने,बता  दिया चोरी का पूरा |
कहे 'राजकवि' कहा नोट को अन्दर करके,
आ दो दिन के बाद,अभी जा सोजा घर पे |

क्यों दोदिन के बाद क्यों लिखिये अभी रिपोर्ट |
अभी लिखो जो आप तो,क्या है उसमे खोट |
क्या   है उसमे खोट,कहा  तो वह्  गुर्राया,
और कान में चुपके से,यह   राज़  बताया |
बोला   जी डी चल  रही,दो दिन पीछे यार,
लिक्खूं  कैसे मैं  रपट,बेबस  है  सरकार  |

भागी कन्या पकड़ कर,लाए   दरोगा साब |
दो दिन से निबटा रहे,उसका सभी हिसाब |
उसका सभी हिसाब,'स्टेटमेंट'  उसके लेते हैं,
लेकर  'पूर्ण बयान',सीनियर  को  देते हैं |
कहे 'राज कविराय',आज 'एस ओ' जी लेंगे,
ले कर 'पूर्ण बयान',पेश  न्यायालय  कर देंगे |

इसी लिए 'जी डी' रूकी,परसों होगा काम |
कर्म जरूरी  'ब्यान'  है,लेते सब हुक्काम |
लेते सब हुक्काम,बहुत  से 'हफ्ते' आने हैं,
 मुझको ही नीचे  से ऊपर तक, बंटवाने हैं |
कह मुंशी सुन 'राज',रपट परसों लिखवाना,
स्टेटमेंट लेने में,बहुत बिजी है, कलसे थाना |

होते भी खाली यदि,काम ये क्या कर लेंगे |
ले इन्क्वायरी  नाम, रोज घर पर पहुंचेगे |
बटर टोस्ट के साथ,मुफ्त  की चाय पियेंगे |
उल्टे   सीधे  कई,आप  से  प्रश्न  करेंगे |
दे कर सौ का नोट,हमें मिल गया इशारा |
झेलो सब  नुकसान,न आओ यहां दुबारा |
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