गुरुवार, 18 जुलाई 2013

होली पर दो कुंडलियाँ


होली के  त्योहार  पर, बरसें रंग  हजार |     
शत्रु-मित्र हर एक का, पाएं अदभुत प्यार |
पाएं अदभुत प्यार, छ्टा हो रंग - बिरंगी,
रहे आप से दूर, दुष्ट - मन हर  हुड़्दंगी |
कहे 'राजकवि' खेलें,जमकर आँख मिचौली,
होली पर हों,  क्लेशहीन-सतरंगी  होली |
-०-
होली पर अपना रखें, नियमित हर आचार |
हर हुड़दंगी से रखें, प्रेम - पूर्ण   व्यवहार |
प्रेम - पूर्ण व्यवहार,  नहीं उलझें - उलझाएं,
नशेबाज से दूर रहें, अति निकट न जाएं |
कहे 'राजकवि' होली पर कविता की चोली ,


जन-मानस में बाँट, मनाली अपनी होली |

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