मंगलवार, 16 जुलाई 2013

आडवाणी पुराण


अडवाणी ने भीष्म बन,चला दिया ब्रह्मास्त्र |
सीखों का लम्बा स्वयं,खोलदिया हर शास्त्र |
खोल दिया हर शास्त्र,  नफ़ीरी अलग  बजाते,
सबको लेकर चलो साथ, यह मन्त्र बताते |
कहे'राज' कवि,अधिक उम्र में सोच सयानी,
बाबर - ढांचा विध्वंस,  भुला बैठे अडवाणी ?
-०-
भजन-कीर्तन उम्र में,  ले सत्ता का ख्वाब |
मिटटी सबकी जानकर, करते फिरें खराब |
करते  फिरें  खराब,  प्रैस  में सब ले जाते,
घातों के हथियार, नवल नित उन्हें थमाते |
कहे'राज' कवि, मातम धुन पर भंगड़ानर्तन, 
घर पर पड़े  अकेले, करलो  भजन-कीर्तन |
-०-
चिन्तन और इतिहास का कुछ तो रखो ख्याल |
हिटलर बन सब कुछ किया,करते नहीं मलाल |
करते  नहीं  मलाल,  उठा  भगवा  रंग परचम ,
लौह - पुरुष बन इतरा रथ पर , चलते हरदम |
कहे 'राज' कवि,  चौथे-पन क्या जिन्ना मण्डन,
ले डालो  सन्यास,  बंद कर  सत्ता  चिन्तन |


-०- 

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